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मंच पर खड़े सफल लोगों द्वारा दी गई यह सलाह कि "वही काम करें जो आपको पसंद है", सुनने में बहुत मीठी लगती है। लेकिन आधुनिक कामकाजी पेशेवरों के लिए यह सलाह सबसे खतरनाक नशीली दवा की तरह है। हम इस वाक्य के नशे में इतने चूर हो जाते हैं कि जैसे ही काम थोड़ा उबाऊ होता है या बॉस के साथ कोई अनबन होती है, हम तुरंत संदेह में पड़ जाते हैं। "क्या यह रास्ता मेरे लिए सही नहीं है?"—यह सवाल अंततः बर्नआउट और बार-बार नौकरी बदलने का कारण बनता है।
असली समस्या जुनून (Passion) को देखने के हमारे नजरिए में है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक शोध के अनुसार, जो लोग फिट माइंडसेट (Fit Mindset) रखते हैं—यानी यह विश्वास करते हैं कि उनके लिए दुनिया में कहीं न कहीं एक 'परफेक्ट' नौकरी मौजूद है—वे काम की चुनौतियों के सामने बहुत कमजोर होते हैं। काम थोड़ा भी नीरस होते ही उनका प्रदर्शन तेजी से गिरने लगता है। इसके विपरीत, डेवलप माइंडसेट (Develop Mindset) वाले लोग, जो मानते हैं कि जुनून विकसित किया जाता है, कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ता दिखाते हैं।
जुनून का असली चेहरा आनंद नहीं, बल्कि पीड़ा है। यदि आप इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर सकते, तो आपका करियर हमेशा एक ही जगह पर अटका रहेगा।
हम जिस Passion (जुनून) की प्रशंसा करते हैं, उसकी जड़ें लैटिन शब्द Passio में हैं। इस शब्द का मूल अर्थ आनंद नहीं, बल्कि Suffering (पीड़ा) या Patience (धैर्य/सहन करना) है। शास्त्रीय संदर्भ में, जुनून का अर्थ उस कष्ट की अवस्था से था जिसे कोई व्यक्ति अपने विश्वासों और मूल्यों के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से सहने को तैयार रहता था।
बिजनेस की दुनिया में भी यही लागू होता है। आप चाहे कोई भी पेशा चुनें, काम का 90% हिस्सा उबाऊ प्रशासन, बार-बार डेटा व्यवस्थित करने और थका देने वाले मानवीय संबंधों से भरा होता है। बाकी 10% शानदार उपलब्धि का स्वाद चखने के लिए, हमें इस 90% की निश्चित लागत (Fixed Cost) चुकानी ही पड़ती है।
अरबपति मार्क क्यूबन इस बात पर जोर देते हैं कि जुनून के पीछे मत भागो, बल्कि अपने प्रयासों (Efforts) का पीछा करो। क्योंकि जब प्रयास संचित होकर कौशल में बदल जाते हैं और आप किसी चीज़ में दूसरों से बेहतर हो जाते हैं, तभी वह पीड़ा 'सक्षमता' की सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
बिना सोचे-समझे सब कुछ सहना कोई गुण नहीं है। आपको शांति से यह पहचानना होगा कि वर्तमान में आप जिस कष्ट से गुजर रहे हैं, वह आपको बड़ा करने वाली दवा है या आपको मारने वाला जहर।
सहने योग्य ग्रोथ पेन (Growth Pain)
छोड़ देने का संकेत (Exit Signal)
आप अपना सारा समय 'जुनून' के साथ नहीं बिता सकते। ऊर्जा का कुशल वितरण ही स्थायी विकास की कुंजी है। इस रूटीन को अपने कार्य तंत्र में लागू करने का प्रयास करें:
नाजी शिविरों से जीवित बचे विक्टर फ्रैंकल ने कहा था कि बिना अर्थ वाली पीड़ा प्रताड़ना है, लेकिन अर्थपूर्ण पीड़ा तपस्या (Passion) बन जाती है। एंजेला डकवर्थ की पुस्तक ग्रिट (Grit) में भी सफलता को प्रतिभा x प्रयास x प्रयास के रूप में परिभाषित किया गया है। प्रयास का दो बार गुणा होना यह दर्शाता है कि उबाऊ दोहराव की सुरंग से गुजरने की प्रक्रिया अनिवार्य है।
खुद को परिणामों के प्रभाव से बचाने के लिए '24 घंटे का नियम' भी उपयोगी है। चाहे आपने कोई बड़ा कॉन्ट्रैक्ट जीता हो या कोई बड़ी विफलता झेली हो, केवल 24 घंटे तक उस भावना का आनंद लें या दुख मनाएं। उसके बाद, वापस अपने काम के मैदान में लौट आएं। BrightLocal के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 87% उपभोक्ता खरीदने से पहले रिव्यू देखते हैं। बाजार और डेटा को आपकी भावनाओं में कोई दिलचस्पी नहीं है; वे केवल आपके द्वारा किए गए ठोस परिणाम के आधार पर आपका मूल्यांकन करते हैं।
सच्ची करियर सफलता उस स्वर्ग की खोज नहीं है जहाँ कोई पीड़ा न हो। यह उस पीड़ा को चुनने का निर्णय है जिसे आप खुशी-खुशी सहने को तैयार हैं। आपकी मेज पर रखा आज का उबाऊ काम इस बात का प्रमाण है कि आप सही रास्ते पर हैं और यह विकास के लिए चुकाया जाने वाला 'टोल टैक्स' है। सार्थक पीड़ा को चुनें। वहीं से आपके वास्तविक करियर की शुरुआत होती है।